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तस्मै॒ प्राच्या॑दि॒शः ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तस्मै । प्राच्या: । दिश: ॥४.१॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:1


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (प्राच्याः) पूर्व (दिशः) दिशा से ॥१॥
भावार्थभाषाः - विद्वान् लोग निश्चयकरके मानते हैं कि जो मनुष्य परमात्मा में विश्वास करता है, वह पुरुषार्थी जनपूर्वादि दिशाओं और वसन्त आदि ऋतुओं में सुरक्षित रहता है ॥१-३॥
टिप्पणी: १−(तस्मै) विदुषे जनाय (प्राच्याः) पूर्वायाः (दिशः) दिक्सकाशात् ॥