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तामा॑स॒न्दींव्रात्य॒ आरो॑हत् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ताम् । आऽसन्दीम् । व्रात्य: ।आ । अरोहत् ॥३.९॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:9


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा के विराट् रूप का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (ताम्) उस (आसन्दीम्)सिंहासन पर (व्रात्यः) व्रात्य [सब समूहों का हितकारी परमात्मा] (आ अरोहत्) चढ़गया ॥९॥
भावार्थभाषाः - जैसे चक्रवर्ती राजासिंहासन पर ऊँचा बैठता है, वैसे ही परमात्मा सब संसार के ऊपर विराजमान है॥९॥
टिप्पणी: ९−(ताम्) पूर्वोक्ताम् (आसन्दीम्) सिंहासनम् (व्रात्यः) सर्वसमूहहितकारीपरमात्मा (आ अरोहत्) आरूढवान् ॥