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वेद॑ आ॒स्तर॑णं॒ब्रह्मो॑प॒बर्ह॑णम् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

वेद: । आऽस्तरणम् । ब्रह्म । उपऽबर्हणम् ॥३.७॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:7


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा के विराट् रूप का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (वेदः) धन [उस सिंहासनका] (आस्तरणम्) बिछौना और (ब्रह्म) अन्न (उपबर्हणम्) बालिश [शिर रखने का सहारा]था ॥७॥
भावार्थभाषाः - जैसे सिंहासन पर गद्दीऔर बालिश लगाये जाते हैं, वैसे ही परमेश्वर ने संसार में धन और अन्न रचे हैं॥७॥
टिप्पणी: ७−(वेदः) विद्लृ लाभे-असुन्। धनम्-निघ० २।१० (आस्तरणम्) आस्तरः। विष्टरः (ब्रह्म) अन्नम्-निघ० २।७। (उपबर्हणम्) बालिशम् ॥