देवता: भुरिक् प्राजापत्या अनुष्टुप्
ऋषि: अध्यात्म अथवा व्रात्य
छन्द: अथर्वा
स्वर: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
अतिथि के सामर्थ्य का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्य) उस (व्रात्यस्य) व्रात्य [सत्यव्रतधारी अतिथि] का−(यः) जो (अस्य) इस [व्रात्य] का (पञ्चमः) पाँचवाँ (प्राणः) प्राण [श्वास] (योनिः) योनि [कारण] (नाम) नाम है, (ताः) सो (इमाः आपः) ये जल हैं [अर्थात् वह सिखाता है कि जल क्या है और भूमण्डल, मेघमण्डल, सूर्यमण्डल आदि लोकों से क्या सम्बन्ध रखता है] ॥७॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ९ पर देखो॥७॥
टिप्पणी: ७−(योनिः) यु मिश्रणामिश्रणयोः-नि। कारणम् (आपः) जलविद्या। अन्यत् पूर्ववत्स्पष्टं च ॥
