वांछित मन्त्र चुनें

ब्रह्म॑णान्ना॒देनान्न॑मत्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ब्रह्मणा । अन्नऽअदेन । अन्नम् । अत्ति । य: । एवम् । वेद ॥१४.१५॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:14» पर्यायः:0» मन्त्र:24


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

अतिथिके उपकार का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - वह [अतिथि] (अन्नादेन)जीवनरक्षक (ब्रह्मणा) परब्रह्म जगदीश्वर के साथ (अन्नम्) जीवन की (अत्ति) रक्षाकरता है, (यः) जो (एवम्) व्यापक परमात्मा को (वेद) जानता है ॥२४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १, २ के समान॥२३, २४॥
टिप्पणी: २३, २४−(सर्वान्)समस्तान् (अन्तर्देशान्) मध्यदेशान् (परमेष्ठी) सर्वोपरिपदस्थः (ब्रह्म)परमात्मानम् (ब्रह्मणा) परमात्मना सह। अन्यत् पूर्ववत्-म० १, २ ॥