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स्व॑धाका॒रेणा॑न्ना॒देनान्न॑मत्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स्वधाऽकारेण । अन्नऽअदेन । अन्नम् । अत्ति । य: । एवम् । वेद ॥१४.१४॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:14» पर्यायः:0» मन्त्र:14


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

अतिथिके उपकार का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - वह [अतिथि] (अन्नादेन)जीवनरक्षक (स्वधाकारेण) अपने धारणसामर्थ्य से (अन्नम्) जीवन की (अत्ति) रक्षाकरता है, (यः) जो (एवम्) व्यापक परमात्मा को (वेद) जानता है ॥१४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १, २ के समान॥१३, १४॥