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न पि॑तृ॒याणं॒पन्थां॑ जानाति॒ न दे॑व॒यान॑म् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न । पितृऽयानम् । पन्थाम् । जानाति । न । देवऽयानम् ॥१२.९॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:12» पर्यायः:0» मन्त्र:9


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

यज्ञ करने में विद्वान् की सम्मति का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - वह (न) न तो (पितृयाणम्) पितरों [पालनकर्ता बड़े लोगों] के चलने योग्य (पन्थाम्) मार्ग को (जानाति) जनता है, और (न) न (देवयानम्) देवताओं [विद्वानों] के चलने योग्य [मार्ग] को [जनता है] ॥९॥
भावार्थभाषाः - जो अयोग्य गृहस्थनीतिज्ञ वेदवेत्ता अतिथि की आज्ञा बिना मनमाना काम करने लगता है, वह अनधिकारीहोने से शुभ कार्य सिद्ध नहीं कर सकता और न लोग उसकी कुमर्यादा को मानते हैं॥८-११॥
टिप्पणी: ९−(न) निषेधे। अन्यत्पूर्ववत्-म० ५ ॥