देवता: द्विपदा प्राजापत्या बृहती
ऋषि: अध्यात्म अथवा व्रात्य
छन्द: अथर्वा
स्वर: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
अतिथिसत्कार के विधान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (एनम्) उस [गृहस्थ] को (वशः) प्रधानत्व (आ) आकर (गच्छति) मिलता है, वह (वशिनाम्) वशकर्ताओं का (वशी) वशकर्ता [शासक] (भवति) होता है, जो [गृहस्थ] (एवम्) ऐसे [विद्वान्] को (वेद) जानता है ॥९॥
भावार्थभाषाः - गृहस्थ विद्वान् नीतिज्ञ अतिथि का प्रभुत्व रखकर शासकों का शासक होवे ॥९॥
