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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्माऔर जीवात्मा का उपदेश अथवा सृष्टिविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (नीलम्) निश्चित ज्ञान (अस्य) उस [परमात्मा] का (उदरम्) उदर [समान है] और (लोहितम्) उत्पन्न करने कासामर्थ्य (पृष्ठम्) पीठ [समान है] ॥७॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा में निश्चितज्ञान और सृष्टिरचना स्वाभाविक गुण हैं ॥७॥
टिप्पणी: ७−(नीलम्) नि+इल गतौ-क,। इलावाङ्नाम-निघ० १।११। नि निश्चितं ज्ञानम् (अस्य) परमात्मनः (उदरम्) उदरस्थानीयम् (लोहितम्) रुहेरश्च लो वा। उ० ३।९४। रुह बीजजन्मनि प्रादुर्भावे च-इतन्, रस्यलः। उत्पादनसामर्थ्यम् (पृष्ठम्) पृष्ठतुल्यम् ॥
