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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्माऔर जीवात्मा का उपदेश अथवा सृष्टिविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) उसने (देवानाम्)सब व्यवहारकुशलों की (ईशाम्) ईश्वरता [प्रभुता] को (परि ऐत्) सब ओर से पाया और (सः) वह (ईशानः) परमेश्वर (अभवत्) हुआ ॥५॥
भावार्थभाषाः - वह परमेश्वर ही सबव्यवहारकुशलों से अद्वितीय बड़ा चतुर है, इसी से वह परमेश्वर है ॥५॥
टिप्पणी: ५−(सः)परमात्मा (देवानाम्) व्यवहारकुशलानाम् (ईशाम्) ईश ऐश्वर्ये-अ, टाप्। ईशा ईशस्यपत्नी विभूतिः। ईश्वरताम्। प्रभुताम् (परि) सर्वतः (ऐत्) प्राप्नोत् (सः) (ईशानः) ईश-चानश्। परमेश्वरः (अभवत्) ॥
