पदार्थान्वयभाषाः - (यम्) जो (ब्रह्मभागम्) ब्रह्मा [वेदवेत्ता] का भाग [अर्थात्] (वाधूयम्) विवाह का (वासः)पहिरने योग्य (वस्त्रम्) वस्त्र [योग्यता का चिह्न] (वधूयोः=वधूयवे) वधू केकामना करनेवाले (मे) मुझ (ब्रह्मणे) ब्रह्मा [वेदवेत्ता वर] को (च) और (वध्वः=वध्वै) वधू को (दत्तः) वे दोनों [वर और वधू के पक्षवाले] देते हैं। (बृहस्पते)हेबृहस्पति ! [बड़ी विद्या के रक्षक आचार्य] (च) और (इन्द्रः) हे बड़ेऐश्वर्यवाले राजन् ! (साकम्) साथ-साथ (अनुमन्यमानौ) अनुमति देते हुए (युवम्)तुम दोनों [वह वस्त्र] (दत्तम्) देओ ॥४२॥
भावार्थभाषाः - जब वधू-वर के पक्षवालेयुवा-युवती का विवाह निश्चित करें, तब वे राजव्यवस्था और गुरुकुल आदि की शिक्षाके अनुसार दोनों की आयु, विद्या, स्वस्थता, सुशीलता आदि योग्यता को अवश्य विचारलेवें ॥४२॥