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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (महेन्द्रः) बड़ा ऐश्वर्यवान् (आवृतः) सब ओर से ढका हुआ [अन्तर्यामी परमेश्वर] (रश्मिभिः) किरणों द्वारा (आभृतम्) सब प्रकार पुष्ट किये हुए (नभः) मेघमण्डल में (एति) व्यापक है ॥९॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २ के समान है ॥९॥यह मन्त्र ऊपर आ चुका है-मन्त्र २ ॥
टिप्पणी: ९−अयं मन्त्रो व्याख्यातः-म० २ ॥
