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र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

रश्मिऽभि: । नभ: । आऽभृतम् । महाऽइन्द्र: । एति । आऽवृत: ॥४.९॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:9


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (महेन्द्रः) बड़ा ऐश्वर्यवान् (आवृतः) सब ओर से ढका हुआ [अन्तर्यामी परमेश्वर] (रश्मिभिः) किरणों द्वारा (आभृतम्) सब प्रकार पुष्ट किये हुए (नभः) मेघमण्डल में (एति) व्यापक है ॥९॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ˜२ के समान है ॥९॥यह मन्त्र ऊपर आ चुका है-मन्त्र २ ॥
टिप्पणी: ९−अयं मन्त्रो व्याख्यातः-म० २ ॥