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नम॑स्ते अस्तु पश्यत॒ पश्य॑ मा पश्यत ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नम: । ते । अस्तु । पश्यत । पश्य । मा । पश्यत ॥९.४॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:55


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (पश्यत) हे देखनेवाले [जगदीश्वर !] (ते) तेरे लिये (नमः) नमस्कार (अस्तु) होवे, (पश्यत) हे देखनेवाले ! (मा) मुझको (अन्नाद्येन) भोजनयोग्य अन्न आदि के साथ, (यशसा) यश [शूरता आदि से पाये हुए नाम] के साथ, (तेजसा) तेज [निर्भयता, प्रताप] के साथ और (ब्राह्मणवर्चसा) वेदज्ञान के साथ (पश्य) देख ॥५५, ५६॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य सर्वद्रष्टा परमात्मा की उपासना से पुरुषार्थ और विवेकपूर्वक सब आवश्यक पदार्थ पाकर आनन्द भोगें ॥५५, ५६॥
टिप्पणी: ५५, ५६−सर्वं पूर्ववत्-म० ४८, ४९ ॥