वांछित मन्त्र चुनें

स वै य॒ज्ञाद॑जायत॒ तस्मा॑द्य॒ज्ञोजा॑यत ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स: । वै । यज्ञात् । अजायत । तस्मात् । यज्ञ: । अजायत ॥७.११॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:39


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [परमात्मा] (वै) अवश्य (यज्ञात्) यज्ञ [संयोग-वियोग व्यवहार] से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [परमात्मा] से (यज्ञः) यज्ञ [संयोग-वियोग व्यवहार] (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥३९॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ने परमाणुओं के संयोग-वियोग से सृष्टि रचकर अपनी महिमा दिखायी है ॥३९॥
टिप्पणी: ३९−(यज्ञात्) यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु-नङ्। परमाणूनां संयोगवियोगव्यवहारात् (यज्ञः) संयोगवियोगव्यवहारः। अन्यद् गतम् ॥