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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [परमात्मा] (वै) अवश्य (यज्ञात्) यज्ञ [संयोग-वियोग व्यवहार] से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [परमात्मा] से (यज्ञः) यज्ञ [संयोग-वियोग व्यवहार] (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥३९॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ने परमाणुओं के संयोग-वियोग से सृष्टि रचकर अपनी महिमा दिखायी है ॥३९॥
टिप्पणी: ३९−(यज्ञात्) यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु-नङ्। परमाणूनां संयोगवियोगव्यवहारात् (यज्ञः) संयोगवियोगव्यवहारः। अन्यद् गतम् ॥
