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स वा अ॒द्भ्योजा॑यत॒ तस्मा॒दापो॑ऽजायन्त ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स: । वै । अत्ऽभ्य: । अजायत । तस्मात् । आप: । अजायन्‍त ॥७.९॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:37


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (अद्भ्यः) [कार्यरूप] जल से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (आपः) जल [वृष्टि नदी कूप आदि] (अजायत) उत्पन्न हुए हैं ॥३७॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के समान है ॥३७॥
टिप्पणी: ३७−(अद्भ्यः) जलेभ्यः (आपः) वृष्टिनदीकूपादीनां जलानि। अन्यद् गतम् ॥