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स वा अ॒ग्नेर॑जायत॒ तस्मा॑द॒ग्निर॑जायत ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स: । वै । अग्ने: । अजायत । तस्मात् । अग्नि: । अजायत ॥७.८॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:36


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (अग्नेः) [कार्यरूप] अग्नि से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (अग्निः) अग्नि [सूर्य, बिजुली आदि तेज] (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥३६॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के समान ॥३६॥
टिप्पणी: ३६−(अग्नेः) कार्यरूपात् तेजसः (अग्निः) सूर्यविद्युदादि तेजः। अन्यद् गतम् •॥