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स वै दि॒वोजा॑यत॒ तस्मा॒द्द्यौरधि॑ अजायत ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स: । वै । दिव: । अजायत । तस्मात् । द्यौ: । अधि । अजायत ॥७.५॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:33


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (दिवः) [कार्यरूप] सूर्य से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (द्यौः) सूर्य (अधि) यथाविधि (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥३३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के समान ॥३३॥
टिप्पणी: ३३−(दिवः) कार्यरूपात् सूर्यात् (द्यौः) सूर्यः (अधि) यथाविधि। अन्यद् गतम् ॥