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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (वायोः) [कार्यरूप] पवन से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (वायुः) पवन (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥३२॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के समान ॥३२॥
टिप्पणी: ३२−(वायोः) कार्यरूपात् पवनात् (वायुः) पवनः। अन्यद् गतम् ॥
