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स वा अ॒न्तरि॑क्षादजायत॒ तस्मा॑द॒न्तरि॑क्षमजायत ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स: । वै । अन्तरिक्षात् । अजायत । तस्मात् । अन्तर‍िक्षम् । अजायत ॥७.३॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:31


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (अन्तरिक्षात्) [कार्यरूप] अन्तरिक्ष से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (अन्तरिक्षम्) अन्तरिक्ष (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥३१॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के समान ॥३१॥
टिप्पणी: ३१−(अन्तरिक्षात्) कार्यरूपान्मध्यलोकात् (अन्तरिक्षम्)। अन्यद् गतम् ॥