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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (रात्र्याः) [कार्यरूप] रात्रि से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (रात्रिः) रात्रि (अजायत) उत्पन्न हुई है ॥३०॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के समान है ॥३०॥
टिप्पणी: ३०−(रात्र्याः) कार्यरूपाया निशायाः (रात्रिः) निशा। अन्यद् यथा म० २९ ॥
