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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इमे सर्वे) यह सब (यातवः) चलनेवाले [पृथिवी आदि लोक और प्राणी] (तस्य) उस [परमेश्वर] के (प्रशिषम्) उत्तम शासन को (उप आसते) मानते हैं ॥२७॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा के ही नियम में सब लोक और सब प्राणी चलते हैं ॥२७॥
टिप्पणी: २७−(तस्य) परमेश्वरस्य (इमे) विद्यमानाः (सर्वे) (यातवः) कमिमनिजनिगाभायाहिभ्यश्च। उ० १।७३। या गतिप्रापणयोः-तु। गतिशीलाः पृथिव्यादिलोकाः प्राणिनश्च (प्रशिषम्) शासु अनुशिष्टौ-क्विप्। उत्तमं शासनम् (उपासते) सेवन्ते ॥
