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य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

य: । एतम् । देवम् । एकऽवृतम् । वेद ॥६.३॥

अथर्ववेद » काण्ड:13» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:24


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो (एतम्) इस (देवम्) प्रकाशमय (एकवृतम्) अकेले वर्तमान [परमात्मा] को (वेद) जानता है ॥२४॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य परमात्मा के गुणों को साक्षात् करते हैं, वे ही संसार में अनेक प्रकार आत्मोन्नति करके अनेक आनन्द पाते हैं ॥२२-२४॥
टिप्पणी: २४−अयं व्याख्यातः-म० १५ ॥