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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (भूतम्) अतीत वस्तु (च) और (भव्यम्) होनहार वस्तु (च) और (श्रद्धा) श्रद्धा [विश्वास] (च) और (रुचिः) रुचि [प्रीति] (च) और (स्वर्गः) स्वर्ग [आनन्द] (च च) और (स्वधा) आत्मधारण शक्ति [उस पुरुष के लिये होते हैं] ॥२३॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य परमात्मा के गुणों को साक्षात् करते हैं, वे ही संसार में अनेक प्रकार आत्मोन्नति करके अनेक आनन्द पाते हैं ॥२२-२४॥
टिप्पणी: २३−(भूतम्) अतीतं वस्तु (च) (भव्यम्) भविष्यद् वस्तु (च) (श्रद्धा) विश्वासः (रुचिः) प्रीतिः (च) (स्वर्गः) सुखप्रापकः। आनन्दः (च) (स्वधा) आत्मधारणशक्तिः (च) ॥
