पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अस्मिन्) इस [परमात्मा] में (एते) यह सब (देवाः) चलनेवाले [पृथिवी आदि लोक] (एकवृतः) एक [परमात्मा] में वर्तमान (भवन्ति) रहते हैं ॥१३॥
भावार्थभाषाः - यह सब जगत् प्रलय में कारणरूप से और सृष्टि में कार्यरूप से उसी परमात्मा के सामर्थ्य के बीच विद्यमान रहता है ॥१३॥
टिप्पणी: १३−(एते) दृश्यमानाः (अस्मिन्) परमात्मनि (देवाः) गतिशीलाः पृथिव्यादिलोकाः (एकवृतः) एकस्मिन् परमात्मनि वर्तमानाः (भवन्ति) ॥
