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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (दिवः) प्रकाश के (अधिपतिः) अधिपति [बड़े स्वामी], (रोहितः) सर्वजनक [परमेश्वर] ने (सर्वाः) सब (दिशः) दिशाओं में (सम् अचरत्) संचार किया है। (दिवम्) सूर्य, (समुद्रम्) अन्तरिक्ष (आत्) और (भूमिम्) भूमि और (सर्वम्) सब (भूतम्) सत्तावाले [जगत्] की (वि) विविध प्रकार (रक्षति) रक्षा करता है ॥४१॥
भावार्थभाषाः - सर्वशक्तिमान् परमेश्वर सब में व्यापक होकर सबकी रक्षा करता है, सब मनुष्य उसकी उपासना करें ॥४१॥
टिप्पणी: ४१−(सर्वाः) (दिशः) पूर्वादिदिशाः (समचरत्) विचरितवान् (रोहितः) सर्वजनकः परमेश्वरः (अधिपतिः) अध्यक्षः (दिवः) प्रकाशस्य (दिवम्) सूर्यम् (समुद्रम्) अन्तरिक्षम् (आत्) अपि (भूमिम्) (सर्वम्) (भूतम्) जगत् (वि) विविधम् (रक्षति) पाति ॥
