0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (स्वर्विदः) सुख पहुँचानेवाले (रोहितस्य) सबके उत्पन्न करनेवाले परमेश्वर के (ब्रह्मणा) वेदज्ञान द्वारा (अग्नि) अग्नि [सूर्य आदि] (सम् इध्यते) यथावत् प्रकाशित होता है। (तस्मात्) उसी [परमेश्वर] से (घ्रंसः) ताप (तस्मात्) उसी से (हिमः) शीत और (तस्मात्) उसी से (यज्ञः) यज्ञ [संयोग-वियोग व्यवहार] (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥४८॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर के सामर्थ्य से ही सूर्य-चन्द्र आदि पदार्थ उत्पन्न होकर ताप शीत, संयोग-वियोग द्वारा संसार का उपकार करते हैं ॥४८॥
टिप्पणी: ४८−(स्वर्विदः) सुखप्रापकस्य (रोहितस्य) सर्वोत्पादकस्य परमेश्वरस्य (ब्रह्मणा) वेदज्ञानेन (अग्निः) सूर्यादिः (समिध्यते) यथाविधि दीप्यते (तस्मात्) परमेश्वरात् (घ्रंसः) तापः (तस्मात्) (हिमः) शीतधर्मः (तस्मात्) (यज्ञः) संयोगवियोगव्यवहारः (अजायत) उदपद्यत ॥
