वांछित मन्त्र चुनें

क्षि॒प्रं वै तस्या॒हन॑ने॒ गृध्राः॑ कुर्वत ऐल॒बम् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

क्षिप्रम् । वै । तस्य । आऽहनने । गृध्रा: । कुर्वते । ऐलबम् ॥१०.१॥

अथर्ववेद » काण्ड:12» सूक्त:5» पर्यायः:0» मन्त्र:47


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (क्षिप्रम्) शीघ्र (वै) निश्चय करके (तस्य) उस [वेदनिन्दक] के (आहनने) मार डालने पर (गृध्राः) गिद्ध आदि (ऐलबम्) कलकल शब्द (कुर्वते) करते हैं ॥४७॥
भावार्थभाषाः - वेदनिन्दक पुरुष ऐसे बे-ठिकाने संग्राम आदि में मारे जाते हैं कि उनकी लोथों को गिद्ध आदि चींथ-चींथ कर खाते हैं ॥४७॥
टिप्पणी: ४७−(क्षिप्रम्) शीघ्रम् (वै) एव (तस्य) ब्रह्मज्यस्य (आहनने) मारणे (गृध्राः) मांसभक्षकाः पक्षिविशेषाः (कुर्वते) (ऐलबम्) अ० ११।२।३०। इल स्वप्नक्षेपणयोः−घञ्। आङ्+एल+बण शब्दे−ड। आक्षेपध्वनिम् ॥