वांछित मन्त्र चुनें

अव॑र्तिर॒श्यमा॑ना॒ निरृ॑तिरशि॒ता ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अवर्ति: । अश्यमाना । नि:ऽऋति: । अशिता॥८.१०॥

अथर्ववेद » काण्ड:12» सूक्त:5» पर्यायः:0» मन्त्र:37


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - वह [वेदवाणी] (अश्यमाना) खायी जाती हुई [वेदनिन्दक के लिये] (अवर्तिः) निर्धनता, और (अशिता) खायी गयी (निर्ऋतिः) महामारी होती है ॥३७॥
भावार्थभाषाः - अन्यायी लोग वेदविद्या के नाश करने से निर्धनी होकर महाकष्ट भोगते हैं ॥३७॥
टिप्पणी: ३७−(अवर्तिः) अ० ९।२।३। निर्जीविका (अश्यमाना) भक्ष्यमाणा (निर्ऋतिः) अ० ३।११।२। कृच्छ्रापत्तिः−निरु० २।७। (अशिता) भक्षिता ॥