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अ॒घं प॒च्यमा॑ना दुः॒ष्वप्न्यं॑ प॒क्वा ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अघम् । पच्यमाना । दु:ऽस्वप्न्यम् । पक्वा ॥८.५॥

अथर्ववेद » काण्ड:12» सूक्त:5» पर्यायः:0» मन्त्र:32


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - वह [वेदवाणी] (पच्यमाना) पचायी जाती हुई [वेदनिरोधक को] (अघम्) महा दुःख, और (पक्वा) पचायी गयी (दुःष्वप्न्यम्) दुष्ट स्वप्न होती है ॥३२॥
भावार्थभाषाः - वेदविद्या का नाश करनेवाला अधर्मी होकर दिन-राति व्याकुल रहता है ॥३२॥
टिप्पणी: ३२−(अघम्) महादुःखम् (पच्यमाना) पाकं नाशं गम्यमाना (दुःष्वप्न्यम्) दुष्टः स्वप्नः (पक्वा) पाकं नाशं गता ॥