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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - वह [वेदवाणी] (अधिधीयमाना) उठायी जाती हुई [वेदविरोधी के लिये] (पाप्मा) अनर्थ, और (अवधीयमाना) गिरायी जाती हुई (पारुष्यम्) [उसको] निठुराई [क्रूरतारूप] होती है ॥३०॥
भावार्थभाषाः - क्रूर वेदनिरोधक लोग अपना अनर्थ करके संसार का भी अनर्थ करते हैं ॥३०॥
टिप्पणी: ३०−(पाप्मा) पापम्। अनर्थः (अधिधीयमाना) ऊर्ध्वं ध्रियमाणा (पारुष्यम्) नैष्ठुर्य्यम् (अवधीयमाना) अधोध्रियमाणा ॥
