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अ॒घवि॑षा नि॒पत॑न्ती॒ तमो॒ निप॑तिता ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अघऽविषा । निऽपतन्ती । तम: । निऽपतिता ॥७.१५॥

अथर्ववेद » काण्ड:12» सूक्त:5» पर्यायः:0» मन्त्र:26


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (निपतन्ती) नीचे गिरती हुई वह [वेदवाणी] (अघविषा) [वेदनिरोधक को] महाघोर विषैली और (निपतिता) नीचे गिरी हुई वह (तमः) [उस को] अन्धकार होती है ॥२६॥
भावार्थभाषाः - वेदवाणी के गुणों का अपमान करनेवाला मूर्खता के कारण घोर नरक में पड़ता है ॥२६॥
टिप्पणी: २६−(अघविषा) म० १२। महाघोरविषयुक्ता यथा (निपतन्ती) अधोगच्छन्ती (तमः) अन्धकारः (निपतिता) अधोगता ॥