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सर्वा॑ण्यस्यां घो॒राणि॒ सर्वे॑ च मृ॒त्यवः॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सर्वाणि। अस्याम् । घोराणि । सर्वे । च । मृत्यव: ॥७.२॥

अथर्ववेद » काण्ड:12» सूक्त:5» पर्यायः:0» मन्त्र:13


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (अस्याम्) इस [वेदवाणी] में [रोके जाने पर−मन्त्र १२] [वेदनिरोधक को] (सर्वाणि) सब (घोराणि) घोर [महाभयानक] कर्म (च) और (सर्वे) सब प्रकार के (मृत्यवः) मृत्यु होते हैं ॥१३॥
भावार्थभाषाः - धर्मनिरूपक वेदवाणी में रोक डालने से संसार में घोर पाप छा जाता है, और सब प्राणी महाकष्ट पाते हैं ॥१३, १४॥
टिप्पणी: १३−(सर्वाणि) समस्तानि (अस्याम्) वेदवाण्याम् (घोराणि) महाभयानककर्माणि (सर्वे) (च) (मृत्यवः) मरणहेतवः ॥