पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (कुतः) कहाँ से [किस कारण से] (इन्द्रः) इन्द्र [मेघ], (कुतः) कहाँ से (सोमः) सोम [प्रेरक वायु], (कुतः) कहाँ से (अग्निः) अग्नि [सूर्य आदि तेज] (अजायत) उत्पन्न हुआ है। (कुतः) कहाँ से (त्वष्टा) त्वष्टा [शरीर आदि का कारण पृथिवी तत्त्व] (सम् अभवत्) उत्पन्न हुआ है, (कुतः) कहाँ से (धाता) धाता [धारण करनेवाला आकाश] (अजायत) प्रकट हुआ है ॥८॥
भावार्थभाषाः - मेघ आदि पदार्थ किस कारण से उत्पन्न हुए हैं। इन प्रश्नों का उत्तर अगले मन्त्र में है ॥८॥
टिप्पणी: ८−(कुतः) कस्मात् कारणात् (इन्द्रः) मेघः (सोमः) इत्यस्य मध्यस्थानदेवतासु पाठात्-निरु० ११।२। प्रेरको वायुः (अग्निः) सूर्यादितापः (अजायत) उदपद्यत (त्वष्टा) त्वष्टा तूर्णमश्नुत इति नैरुक्तास्त्विषेर्वा स्याद् दीप्तिकर्मणस्त्वक्षतेर्वा स्यात्करोतिकर्मणः-निरु० ८।१३। इति भूस्थानदेवतासु पाठात्। शरीराणां कारणं पृथिवीतत्त्वम् (धाता) म० ५। लोकानां धारक आकाशः। अन्यद् गतम् ॥
