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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (आलापाः) आलाप [सार्थक बातें] (च) और (प्रलापाः) प्रलाप [अनर्थक बातें, बकवाद] (च च) और (ये) जो (अभिलापलपः) व्याख्यानों के कथनव्यवहार हैं, [उन सब ने और] (आयुजः) उद्योगों, (प्रयुजः) प्रयोजनों और (युजः) योगों [समाधिक्रियाओं], (सर्वे) इन सब ने (शरीरम्) शरीर में (प्र अविशन्) प्रवेश किया ॥२५॥
भावार्थभाषाः - उत्साह के बढ़ानेवाले आलाप आदि व्यवहार शरीर के साथ मनुष्य को सुखदायक होते हैं ॥२५॥
टिप्पणी: २५−(आलापाः) आङ्+लप व्यक्तायां वाचि-घञ्। सार्थकानि वचनानि (प्रलापाः) निरर्थकानि वचनानि (च) (अभिलापलपः) लपेः क्विप्। अभिलापानां व्याख्यानां कथनव्यवहाराः (च) (ये) (सर्वे) (आयुजः) आङ्+युजिर् योगे, युज संयमने-क्विप्। आयोजनानि। उद्योगाः (प्रयुजः) प्रयोजनानि। कारणानि (युजः) युज समाधौ-क्विप्। ध्यानक्रियाः ॥
