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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (ऋचः) स्तुतिविद्याएँ [वा ऋग्वेदमन्त्र] (सामानि) मोक्षज्ञान [वा सामवेदमन्त्र] और (यजुषा सह) विद्वानों के सत्कारसहित [वा यजुर्वेदसहित] (छन्दांसि) आनन्दप्रद कर्म [वा अथर्ववेदमन्त्र] और (पुराणम्) पुराण [पुरातन वृत्तान्त]। [यह सब और] (दिवि) आकाश में [वर्तमान] (दिविश्रितः) सूर्य [के आकर्षण] में ठहरे हुए (सर्वे) सब (देवाः) गतिमान् लोक (उच्छिष्टात्) शेष [म० १। परमात्मा] से (जज्ञिरे) उत्पन्न हुए हैं ॥२४॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर ने सब उत्तम कर्म और वेद आदि शास्त्र और सब पदार्थ मनुष्य के सुख के लिये प्रकट किये हैं ॥२४॥
टिप्पणी: २४−(ऋचः) अ० ११।६।१४। स्तुतिविद्याः। ऋग्वेदमन्त्राः (सामानि) अ० ११।६।१४। मोक्षज्ञानानि। साममन्त्राः (छन्दांसि) अ० ४।३४।१। चदि आह्लादने-असुन्, चस्य छः। आह्लादकर्माणि। अथर्ववेदमन्त्राः (पुराणम्) अ० १०।७।२६। पुरातनवृत्तान्तः (यजुषा) अ० ७।५४।२। विदुषां सत्कारेण। यजुर्मन्त्रेण (सह) शेषं पूर्ववत् ॥
