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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अर्धमासाः) आधे महीने (च) और (मासाः) महीने (च) और (ऋतुभिः सह) ऋतुओं के साथ (आर्तवाः) ऋतुओं के पदार्थ, (घोषिणीः) शब्द करनेवाली (आपः) जलधाराएँ, (स्तनयित्नुः) मेघ की गर्जन, (श्रुतिः) सुनने योग्य [वेदवाणी] और (मही) भूमि (उच्छिष्टे) शेष [म० १। परमात्मा] में हैं ॥२०॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर ने मनुष्य के सुख के लिये पखवाड़े, महीने, ऋतुएँ और ऋतुओं की उपज और अन्य सब पदार्थ उत्पन्न किये हैं ॥२०॥
टिप्पणी: २०−(अर्धमासाः) मासपक्षाः (च) (मासाः) चैत्राद्याः (आर्तवाः) ऋतुषु समुत्पन्नाः पदार्थाः (ऋतुभिः) वसन्तादिभिः (सह) (उच्छिष्टे) (घोषिणीः) शब्दवत्यः (आपः) जलधाराः (स्तनयित्नुः) अ० ४।१५।११। मेघध्वनिः (श्रुतिः) श्रवणीया वेदवाणी (मही) भूमिः ॥
