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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कष्ट हटाने के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इदम्) अब (अहोरात्रे) दिन और राति का और (उभा) दोनों (सूर्याचन्द्रमसौ) सूर्य और चन्द्रमा का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं। (विश्वान्) सब (आदित्यान्) प्रकाशमान विद्वानों का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं, (ते) वे (नः) हमें (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चन्तु) छुड़ावें ॥५॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य विद्वानों के सत्सङ्ग से सूर्य और चन्द्रमा की विद्या और नियम जानकर अपने समय का सुप्रबन्ध करें ॥५॥
टिप्पणी: ५−(अहोरात्रे) (इदम्) इदानीम् (ब्रूमः) (सूर्याचन्द्रमसौ) सूर्यचन्द्रविद्यां नियमं च (उभा) उभौ (विश्वान्) सर्वान् (आदित्यान्) अ० १।९।१। आङ् दीपी दीप्तौ-यक्। आदीप्यमानान्। प्रकाशमानान्। विदुषः पुरुषान्। शेषं गतम्-म० १ ॥
