0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कष्ट हटाने के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इदम्) अब (सर्वान्) सब (देवान्) व्यवहार जाननेवालों, (सत्यसंधान्) सत्य के खोजनेवालों, और (ऋतवृधः) सत्य ज्ञान से बढ़ानेवालों का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं। [अपनी] (सर्वाभिः) सब (पत्नीभिः सह) पत्नियों [वा पालन शक्तियों] के साथ, (ते) वे (नः) हमें (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चन्तु) बचावें ॥२०॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य सब व्यवहारकुशल, सत्यशील, धर्म्मात्मा स्त्री-पुरुषों से शिक्षा प्राप्त करके आनन्दित होवें ॥२०॥
टिप्पणी: २०−(सर्वान्) समस्तान् (देवान्) व्यवहारिणः पुरुषान् (सत्यसंधान्) सत्या संधा, अनुसन्धानमन्वेषणं येषां तान् (ऋतवृधः) सत्यज्ञानेन बुद्धिशीलान्। धार्मिकान्। अन्यत् पूर्ववत्-म० १९ ॥
