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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कष्ट हटाने के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इदम्) अब (विश्वान्) सब (देवान्) विजय चाहनेवालों, (सत्यसंधान्) सत्य प्रतिज्ञावालों और (ऋतवृधः) सत्य ज्ञान के बढ़ानेवालों का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं। [अपनी] (विश्वाभिः) सब (पत्नीभिः सह) पत्नियों [वा पालनशक्तियों] के साथ (ते) वे (नः) हमें (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चन्तु) छुड़ावें ॥१९॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य वीर, सत्यवक्ता, सत्यकर्मी और सत्य विद्याओं के प्रचारक स्त्री-पुरुषों के सत्सङ्ग और सहाय से सुख बढ़ावें ॥१९॥
टिप्पणी: १९−(विश्वान्) सर्वान् (देवान्) विजिगीषून् (इदम्) इदानीम् (सत्यसंधान्) सत्यप्रतिज्ञान् (ऋतवृधः) सत्यज्ञानस्य वर्धयितॄन् (पत्नीभिः) अ० २।१२।१। योषिद्भिः। पालनशक्तिभिः (सह) अन्यत् पूर्ववत् ॥
