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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कष्ट हटाने के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (ऋतून्) ऋतुओं, (ऋतुपतीन्) ऋतुओं के स्वामियों [सूर्य, वायु आदिकों], (आर्तवान्) ऋतुओं से उत्पन्न होनेवाले (हायनान्) पाने योग्य चावल आदि पदार्थों, (संवत्सरान्) बरसों, (मासान्) महीनों (उत) और (समाः) सब अनुकूल क्रियाओं का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं, (ते) वे (नः) हमें (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चन्तु) छुड़ावें ॥१७॥
भावार्थभाषाः - ज्ञानी पुरुष ज्योतिष आदि विद्या से वसन्त आदि ऋतुओं, और उनके कारणों सूर्य, चन्द्र, वायु, पृथिवी आदि और उनकी अनुकूल क्रियाओं से सब काल में उपकार लेकर आनन्द पावें ॥१७॥यह मन्त्र बहुत कुछ-अथर्व० ३।१०।९। से मिलता है ॥
टिप्पणी: १७−(ऋतून्) अ० ३।१०।९। वसन्तादिकालान् (ऋतुपतीन्) सूर्यचन्द्रपृथिवीवाय्वादीन् देवान् (आर्तवान्) अ० ३।१०।९। ऋतूद्भवान् (उत) अपि च (हायनान्) अ० ३।१०।९। ओहाङ् गतौ−ण्युट्। प्राप्तव्यान् व्रीह्याद्यान् भोज्यपदार्थान् (समाः) अ० २।६।१। अनुकूलाः क्रियाः (संवत्सरान्) वर्षकालान् (मासान्) चैत्रादिकालान्। अन्यत् पूर्ववत् ॥
