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खलः॒ पात्रं॒ स्फ्यावंसा॑वी॒षे अ॑नू॒क्ये ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

खल: । पात्रम् । स्‍फ्यौ । अंसौ । इषे इति । अनूक्ये३ इति ॥३.९॥

अथर्ववेद » काण्ड:11» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:9


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (खलः) खलियान [धान्यमर्दन स्थान] (पात्रम्) [उसका] पात्र [बासन समान], (स्फ्यौ) दो फाने [लकड़ी की खपच] (अंसौ) [उसके] दो कन्धे, (ईषे) दोनों मूठ और हरस [हल के अवयव] (अनूक्ये) [उसकी] रीढ़ की दो हड्डियाँ हैं ॥९॥
भावार्थभाषाः - खलियान आदि स्थान और हल के अवयव आदि परमेश्वर के उपदेश से बनाये जाते हैं ॥९॥
टिप्पणी: ९−(खलः) धान्यमर्दनस्थानम् (पात्रम्) अमत्रम् (स्फ्यौ) माछाससिभ्यो यः। उ० ४।१०९। स्फायी वृद्धौ-य, स च डित्। प्रवृद्धौ काष्ठकीलकौ (अंसौ) स्कन्धौ (ईषे) अ० २।८।४। ईष गतौ-क, टाप्। लाङ्गलदण्डौ (अनूक्ये) अ० २।३३।२। अनु+उच समवाये-ण्यत्, टाप्। पृष्ठास्थिनी ॥