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कब्रु॑ फली॒कर॑णाः॒ शरो॒ऽभ्रम् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

कब्रु । फलीऽकरणा: । शर: । अभ्रम् ॥३.६॥

अथर्ववेद » काण्ड:11» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:6


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (कब्रु) विचित्र रङ्गवाला [जगत्] (फलीकरणाः) [उसका] फटकन [भुसी आदि] और (अभ्रम्) बादल (शरः) [उसका] घास-फूँस [समान] है ॥६॥
भावार्थभाषाः - श्वेत पीत आदि वर्ण युक्त जगत् और मेघ आदि परमेश्वर की अति छोटी वस्तु हैं ॥६॥
टिप्पणी: ६−(कब्रु) मीपीभ्यां रुः। उ० ४।१०—१। कबृ स्तुतौ वर्णे च। रु प्रत्ययः। वर्णितम्। विचित्रीकृतं जगत् (फलीकरणाः) ञिफला विदारणे-अच्+डुकृञ् करणे-ल्यु, च्वि च। स्फोटनेन विदारिततुषादयः (शरः) शॄ हिंसायाम्-अप्। तृणम् (अभ्रम्) अब्भ्रम्। मेघः ॥