0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (न एव) न तो (अहम्) मैंने (ओदनम्) ओदन [सुख बरसानेवाले अन्नरूप परमेश्वर] को [खाया है] और (न) न (माम्) मुझको (ओदनः) ओदन [सुख बरसानेवाले परमेश्वर] ने [खाया] है ॥३०॥
भावार्थभाषाः - यह मन्त्र २७ का उत्तर है। जीवात्मा और परमात्मा दोनों अनादि, अन्तरहित और अविनाशी हैं ॥३०॥
टिप्पणी: ३०−(न) निषेधे (एव) निश्चयेन (अहम्) प्राणी प्राशिषमिति शेषः म० २७। (ओदनम्) सुखवर्षकमन्नरूपं परमात्मानम् (न) निषेधे (माम्) जीवात्मानम् (ओदनः) अन्नरूपः परमेश्वरः प्राशीदिति शेषः म० २७॥
