पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (चक्षुः) [उसकी] दर्शन शक्ति (मुसलम्) मूसल [समान], [उसकी] (कामः) कामना (उलूखलम्) ओखली [समान] है ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर संसार में दृष्टि मात्र से कूटने आदि व्यवहार करता और इच्छा मात्र से सूक्ष्म बनाकर यथावत् रखने की क्रिया करता है, अर्थात् स्थूल भूतों से सूक्ष्म समीचीन रचना करना उसी के वश में है ॥३॥
टिप्पणी: ३−(चक्षुः) दृष्टिसामर्थ्यम् (मुसलम्) अ० ९।६(१)।१५। मुस खण्डने-कल, चित्। कुट्टनसाधनम् (कामः) अभिलाषः (उलूखलम्) अ० ९।६(१)।१५। धान्यादिमर्दनसाधनम् ॥
