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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - “(च) यदि (पराञ्चम्) दूरवर्ती (एनम्) इस [ओदन] को (प्राशीः) तूने खाया है, (प्राणाः) श्वास के बल (त्वा) तुझे (हास्यन्ति) त्यागेंगे (इति) ऐसा वह [आचार्य] (एनम्) इस [जिज्ञासु] से (आह) कहता है ॥२८॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र २९ के साथ ॥२८॥
टिप्पणी: २८−(पराञ्चम्) म० २६। दूरे गच्छन्तम् (च) चेत् (एनम्) ओदनम् (प्राशीः) म० २६। प्रकर्षेण भक्षितवानसि (प्राणाः) श्वासबलानि (त्वा) (हास्यन्ति) ओहाक् त्यागे। त्यक्ष्यन्ति (इति) एवम् (एनम्) जिज्ञासुम् (आह) ब्रूञ् व्यक्तायां वाचि लट्। ब्रवीति ॥
