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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [क्या] (त्वम्) तूने (ओदनम्) ओदन [सुख बरसानेवाले अन्नरूप परमेश्वर] को (प्र आशीः३) खाया है, [अथवा] (त्वा) तुझको (ओदना३ इति) ओदन [सुखवर्षक अन्नरूप परमेश्वर] ने ? ॥२७॥
भावार्थभाषाः - प्रश्न है कि क्या मनुष्य परमेश्वर को अन्न समान खाता है, वा परमेश्वर मनुष्य को अन्न तुल्य खाता है। इसका उत्तर मन्त्र ३० तथा ३१ में है ॥२७॥
टिप्पणी: २७−(त्वम्) (ओदनम्) सुखवर्षकमन्नरूपं परमात्मानम् (प्र) (आशीः३) म० २६। भक्षितवानसि (ओदनाः ३) विचार्यमाणानाम्। पा० ८।२।९७। इति प्लुतः। सुखवर्षकोऽन्नतुल्यः परमेश्वरः (इति) वाक्यसमाप्तौ ॥
