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ऋ॒तवः॑ प॒क्तार॑ आर्त॒वाः समि॑न्धते ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ऋतव: । पक्तार: । आर्तवा: । सम् । इन्धते ॥३.१७॥

अथर्ववेद » काण्ड:11» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:17


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (ऋतवः) ऋतुएँ और (आर्तवाः) ऋतुओं के अवयव [महीने दिन राति आदि] (पक्तारः) पाककर्ता होकर [अग्नि को] (सम्) यथानियम (इन्धते) जलाते हैं ॥१७॥
भावार्थभाषाः - ऋतुएँ और महीने आदि ईश्वरनियम से संसार में पचन क्रिया करते हैं ॥१७॥
टिप्पणी: १७−(ऋतवः) वसन्तादयः (पक्तारः) पाचकाः (आर्तवाः) ऋतूनामवयवाः (सम्) सम्यक् (इन्धते) दीपयन्ति, अग्निं ज्वलयन्ति ॥