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ब्रह्म॑णा॒ परि॑गृहीता॒ साम्ना॒ पर्यू॑ढा ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ब्रह्मणा । परिऽगृहिता । साम्ना । परिऽऊढा ॥३.१५॥

अथर्ववेद » काण्ड:11» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:15


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (ब्रह्मणा) ब्रह्मा [वेदज्ञाता] करके (परिगृहीता) ग्रहण की गई वह [कुम्भी] (साम्ना) दुःखनाशक [मोक्ष ज्ञान] द्वारा (पर्यूढा) सब ओर ले जायी गयी है ॥१५॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्मज्ञानी लोग वेदवाणी को ग्रहण करके मोक्ष प्राप्त करते हैं ॥१५॥
टिप्पणी: १५−(ब्रह्मणा) ब्रह्मवादिना ब्राह्मणेन (परिगृहीता) स्वीकृता (साम्ना) षो अन्तकर्मणि-मनिन्। दुःखनाशकेन मोक्षज्ञानेन (पर्यूढा) वह प्रापणे-क्त। सर्वतो नीता ॥