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ऋ॒चा कु॒म्भ्यधि॑हि॒तार्त्वि॑ज्येन॒ प्रेषि॑ता ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ऋचा । कुम्भी । अधिऽहिता । आर्त्विज्येन । प्रऽइषिता ॥३.१४॥

अथर्ववेद » काण्ड:11» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:14


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (कुम्भी) कुम्भी [छोटा पात्र] (ऋचा) वेदवाणी के साथ (अधिहिता) ऊपर चढ़ाई गई और (आर्त्विज्येन) ऋत्विजों [सब ऋतुओं में यज्ञ करनेवालों] के कर्म से (प्रेषिता) भेजी गई है ॥१४॥
भावार्थभाषाः - जैसे जल आदि के लिये कुम्भी उपकारी होती है, वैसे ही वेदवाणी विद्वानों द्वारा प्रचरित होकर हित करती है ॥१४॥
टिप्पणी: १४−(ऋचा) ऋग् वाङ्नाम-निघ० १।११। स्तुत्या वेदवाण्या सह (कुम्भी) जलादिलघुपात्रम्। उखा (अधिहिता) उपरि स्थापिता (आर्त्विज्येन) गुणवचनब्राह्मणादिभ्यः कर्मणि च। पा० ५।१।१२४। ऋत्विज्−ष्यञ्। ऋत्विजां कर्मणा (प्रेषिता) प्रेरिता ॥