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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सीताः) जोतने की रेखाएँ (पर्शवः) [उसकी पसलियाँ] और (सिकताः) बालू (ऊबध्यम्) [उसके] कुपचे अन्न [समान] है ॥१२॥
भावार्थभाषाः - ईश्वर प्रत्येक परमाणु में व्यापक है ॥१२॥
टिप्पणी: १२−(सीताः) कर्षणोत्पन्ना लाङ्गलपद्धतयः (पर्शवः) पार्श्वास्थीनि (सिकताः) बालुकाः (ऊबध्यम्) अ० ९।४।१६। दुर्+बध बन्धने-यत्, दकारलोपे, ऊत्वम्। अजीर्णमन्नम् ॥
